Rahu gives big success in share market and politics

Positive Rahu Effect in Share Market and Politics

Rahu gives big success in share market and politics

Positive Rahu Effect in Share Market and Politics by Shrimali Ji: राहू के बारे में जितने भी आधुनिक ज्योतिषी लिखते है बुरा ही लिखते है। कारण भी है राहू है भी ऐसा ही क्योंकि वो केतु के साथ मिलकर कुंडली का सबसे बड़ा दोष कालसर्प दोष बना देता है। कालसर्प दोष से पीड़ित कुंडली का जातक हर काम में रूकावट, परेशानियाँ देखता ही है। मतिभ्रम,अज्ञात भय, अकेलेपन का शिकार वो व्यक्ति हो ही जाता है। निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। बहुत कमजोर राहू के लोग लापता तक हो जाते है। बेगानो सा जीवन जिने लगते है। मूल-त्रिकोण का राहू कई बच्चों को कभी ठीक ना होने वाली बीमारियाँ भी दे देता है। राहू शनि से पीड़ित होकर कैंसर रोग का कारण भी बनता है। इतने अवगुणों के बाद भी राहू आज की दुनियाँ का सबसे प्रासंगिक ग्रह बन चुका है। कारण भी है- राहू राजयोग का कारक ग्रह है राजनिती में सफलता दिलाने वाला ग्रह राहू ही है किसी जातक का सवाल यदि राजनिती में सफलता या असफलता से जुड़ा है तो आप राहू को इगनोर नही कर सकते।

विदेश यात्रा करवाने वाला व विदेश जाकर धन कमाने के योग भी कुंडली में राहू ही तय करता है। शेयर का काम करने वाले, शराब व दवाइयों का काम करने वाले राहू की कुंडली में अच्छी स्थिति बिना बड़ा धन नही कमा सकते। राहू आपके sixth sense को भी विकसित करता है। कोई भी नव-निर्माण या आविष्कार करने वाले लोगों की कुंडली में राहू की स्थिति अच्छी होना बहुत ज़रूरी है। अनुसंधान करने वालो और ज्योतिषी की कुंडली में यदी राहू अच्छा है तो वे इन क्षेत्रों में अपार सफलता हासिल करते है। तो आप अपने आसपास देखेंगे तो पायेंगे की राजनिती, विदेश से आय व शराब, नशे व शेयर से ही लोगों ने तेज़ी से धन कमाया है। तो इसलिए मैं कहता हूँ राहू की लीला अपरम्पार है। कुंडली मे राहू अच्छा तो सब अच्छा राहू ख़राब तो सब ख़राब- ये लिखकर मैं कोई अतिशयोक्ति नही कर रहा। आप भी यदी शेयर का कारोबार करना चाहते है। विदेश जाकर सैटल होने की सोच रहे है। राजनिती में जाने की सोच रहे है तो अपनी कुंडली का विश्लेषण जरूर करवा लें।

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“Saturn” is not an enemy, it is friend

“Saturn” is not an enemy, it is friend

शत्रु नहीं हमारे मित्र हैं ‘शनि’ | Saturn (Shani) - Our Worst Enemy or Best Friend? | “Saturn” is not an enemy, it is friend by Artrologer Shrimali Ji

 “Saturn” is not an enemy, it is friend by Artrologer Shrimali Ji: शनि का नाम सुनते ही कईयों को चक्कर आने लगते है। और मै जैसे ही किसी को कहता हूँ- आपको शनि की साढ़ेसाती चल रही है या आपको शनि की ढयया चल रही है तो उनके चेहरे का रंग बदल जाता है.. आखिर ऐसा क्यों!! शनि को लेकर लोग इतने भयभीत और चिंतित क्यों हो जाते है जबकी दुनियाँ के सबसे ज़्यादा उघोग और व्यापार शनि के नियंत्रण में है और आपको जानकर आश्चर्य होगा की दुनियाँ में अरबपति बनने वालो की संख्या में से 30%लोगो ने शनि की साढ़ेसाती लगने पर उस मुक़ाम को पाया है।

तो आईये एक नज़र शनि का नियंत्रण किन-किन उद्यमों पर है। सबसे पहला-निर्माण लोहा, लकडी, सिमेंट, ईंट, पत्थर, खनिज, खान, हार्डवेयर, तेल, कागज, रेल, ट्रांसपोर्ट, बैंक, इंसोरेस, कबाड़ी, अख़बार, किराये से आय। ये मुख्य व्यापार है उघोग है।जो शनि के नियंत्रण में रहते है।

और अब अगर बात करूँ नौकरियों की तो जो भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन कारोबारों से जुडे है वे सभी भी शनि के अधिन ही आते है,इसके अलावा चार्टड एकाउंटेंट, एकाउंटेंट,वकील,जज,स्टाम्प वेंडर,बैंक कर्मी, पंचायत व न्यायालयों मे काम करने वाले, कम्प्यूटर का काम करने वाले भी शनि के अधिन ही आते है तो आपका सवाल होगा की तो फिर बचा क्या?

ठीक सोचा आपने- लगभग जो आधी दुनियाँ के काम-काज जो है वो शनि के अधिन ही है।मज़दूर और ठेला चलाने वालों पर भी शनि का ही नियंत्रण है। तो इतने लोगों को काम देने वाला शनि आपका शत्रु कैसे हो सकता है वो आपको काम तो दे ही रहा है। उच्च का होकर उच्चतम देगा और नीच का होकर नीचतम देगा वो कैसे मै समझाता हूँ-

यदि किसी की कुंडली मे शनि उच्च का है तो वो आदमी खनिज विभाग में उच्च अधिकारी बनेगा और शनि नीच का हो जाये तो वो खान में मज़दूर होगा, परन्तु ये तय है शनि किसी को बेरोज़गार नही रखता, कर्महिन नही रखता।शनि न्याय के देवता है। ग्रहों मे उन्हें न्यायाधीपति की उपाधी प्राप्त है। और एक बात और शनि कुंडली के जिस घर जिस भाव में बैठता है उस भाव को कभी हानि नही देता है।उस घर को कभी ख़राब नही होने देता है।शनि अपने भाव के पुरे फल उस जातक को देता है।

शनि रोग भाव में बैठकर आदमी को रोगी नही होने देता।आठवें बैठकर जातक की अकाल मौत नही होने देता। परन्तु नीच के फल देने पर जेल करवाता है।क़ानूनी कार्रवाई में फँसा रखता है। जितना ज़रूरी हो उतना ही धन देता है। उच्च का शनि होने पर शनि की दशा आदमी को शिखर पर पहुँचा देती है।अकेला शनि अगर कुंडली में अच्छी स्थिति में हो तो वो पुरी कुंडली को अच्छा कर सकने की ताकत रखता है।

शनि पुत्र संतति के कारक ग्रहों में माना जाता है।शरीर मे हड्डियों और दांतों पर घुटनों पर उसका पुरा नियंत्रण है। तो आप ही बताइये- शनि मित्र है की शत्रु!! आप भी शनि की दशा,शनि की साढ़ेसाती भोग रहे है तो अपनी कुंडली को श्रीमाली जी को दिखाकर शनि के अनुसार अपने आप को ढालकर मनचाहा परिणाम पा सकते है।

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Career in Politics Astrology by Shrimali Ji

Career in Politics Astrology by Shrimali Ji

Career in Politics / किनको मिलती है राजनिती में सफलता ?

Career in Politics Astrology by Shrimali Ji: राजनिती में सफलता के लिए किसी भी एक ग्रह का शुभ हो जाना ही काफ़ी है। पर राजनिती भी दो तरह से होती है। एक संगठनात्मक एक नेतृत्व। संगठनात्मक राजनिती मे सफलता के लिए आपकी कुंडली मे शनि की स्थिति अच्छी होनी चाहिए यदी शनि दशम भाव में बैठा हो। पराक्रम स्थान पर बैठकर नीच का हो जाये तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को संगठन से जुड़ी राजनिती में सफलता व फ़ेम मिलता है। संगठनात्मक राजनिती में बहुत कम लोगों की रूचि होती है।

इसलिए आईये अब बात करें नेतृत्व की- नेतृत्व की राजनिती यानी चुनाव लड़कर नेता बनना, इसके लिए जातक की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मज़बूत हो या राहू की स्थिति मज़बूत हो यदी राहू की स्थिति मज़बूत है तो जातक चालाक,चतुर, साम-दाम दण्ड भेद सभी का उपयोग करके सत्ता पा लेगा, यदी कुंडली में चंद्रमा मज़बूत हो तो आदमी बिना ज़्यादा मेहनत के राजनिती में सफलता पा लेता है।

यहाँ आप ये जरूर ध्यान रखें की चंद्रमा पराक्रम स्थान पर नीच का होकर ना बैठा हो या पराक्रमेश चंद्रमा होकर कुंडली में नीच का ना हो। किसी भी कुंडली मे ऐसी स्थिति बनती है तो उसे राजनिती का ज़बरदस्त चस्का होता है।पर वो पा कुछ नही पाता है,इसलिए इस स्थिति वाले जातक को राजनिती छोड़ देनी चाहिए। जननेता या जननायक बनने वाले लोगों की कुंडली में सूर्य या मंगल की स्थिति बहुत अच्छी होती है।

दशा का प्रभाव व राजनिती- कुंडली में राहू यदि नीच का हो और जातक को राहू की ही दशा चल रही हो तो उसे बहुत जल्दी राजनिती में उच्च पद व सम्मान मिल जाता है। परन्तु ये ध्यान रहें राहू शनि या चंद्रमा से पीड़ित ना हो।यदी किसी कुंडली मे राहू चंद्रमा से पिडित हो जाये तो उसे सभी लोग जानते है, उसके प्रभाव को भी समझते है।कई बार बड़ी पार्टियों के टिकट भी ले आते है, पर चुनाव हार जाते है।

चंद्रमा यदि उच्च का हो तीसरे भाव को प्रभावित करता हो और जातक डाक्टर ना हो तब भी चंद्रमा की दशा में जातक को राजनिती में बड़ी सफलता मिलती है। मंगल कुंडली मे उच्च का हो दशम भाव या तीसरे भाव को मंगल प्रभावित करता हो ऐसे जातक क्रांतिकारी विचारों वाले नेता बनते है।उग्र व दबगाई से राजनिती करने मे विश्वास करते है व सफलता पाते है व राजनिती से धन भी कमाते है।

आप भी यदी राजनिती में जाना चाहते है तो एक बार राजनिती से आपका क़िस्मत कनेक्शन जरूर देख लें।

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Sarkari Naukri Yog in Kundali by rajesh shrimali ji best astrologer in jodhpur

Sarkari Naukri Yog in Kundali By Shrimali Ji

Government Job Yog in Kundali | Rajyog in Kundali | Government Job Astrology By Shrimali Ji

Sarkari Naukri Yog in Kundali: लाखों बच्चे हर साल सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठते है, ज़बरदस्त तैयारी भी करते है,परन्तु सफलता केवल चंद को मिलती है, ऐसा नहीं है की जो सफल हुए वे ज़्यादा प्रतिभावान या होशियार थे। ये भाग्य पर निर्भर करता है ये आपकी कुंडली पर निर्भर करता है की आपकी कुंडली में राजयोग है या नहीं। कुंडली में प्रबल राजयोग कैसे बनता है? कौनसे ग्रह बनाते है? कुंडली में सरकारी नौकरी के योग कैसे बनते है? कौनसे ग्रह बनाते है

आइये श्रीमाली जी के जरीये जानते है। यदी आप सिविल सर्विसेज़ की तैयारी कर रहे है तो सबसे महत्वपूर्ण ग्रह बन जाता है राहु और तीसरा भाव, यदी किसी की कुंडली में तीसरे भाव में उच्च का राहु विराजमान है तो उसकी राजयोग या सिविल सर्विसेज़ में सफलता की गारंटी मानी जा सकती है। इसके साथ आपका दशम भाव दोष मुक्त हो। दुसरी स्थिति जब तीसरे भाव में चंद्रमा या सूर्य स्वराशी के या उच्च के होकर विराजमान हो तब भी सफलता की प्रबल संभावना रहती है।

तीसरा यदी पराक्रम स्थान सामान्य हो यानी किसी ग्रह की उच्च स्थिति ना हो परन्तु जातक को उच्च के सूर्य की चंद्रमा की या राहु की दशा चल रही हो तब भी जातक को आसानी से सफलता मिल जाती है। अब यहाँ ध्यान देने योग्य बात ये है की तीसरे भाव में ही ये ग्रह यानी राहु, सूर्य या चंद्रमा बैठे हो परन्तु अस्त हो तो ये लोग 2/5 नम्बर से असफल हो जाते है, इंटर्व्यू तक पहुँच कर बाहर निकाल दिये जाते है। इसलिए इन भावों में ग्रह की प्रबलता व साथ चलने वाली दशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आइये अब ग्रह अनुसार बात करें- यदी आपकी कुंडली में शनि तीसरे भाव या दशम भाव में स्वराशी का उच्च का होकर बैठ जायें तब वह जातक खान,खनिज,रेलवे,पंचायती राज,शिक्षा के क्षेत्र में उच्च पद पाते है।यदी शनि इन्हीं भावों में व इसके अलावा लग्न में नीच के होकर बैठ जायें तो ऐसे जातक बैंक,शिक्षा,सेना,इन्शुरेंस के क्षेत्र में नौकरी पाते हैं व धीरे-धीरे पदोन्नति पाते है। यदी कुंडली में गुरू प्रबल हो व गुरू पंचम,दशम,पराक्रम भाव में हो तब जातक शिक्षा,कृषि, वन, संग्रहालयों, पुस्तकालयों में नौकरी पाता है।

मंगल की स्थिति इन्हीं भावों में उच्च की होने पर जातक पुलिस व सेना, अग्निशमन व इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च पद पाते है। अब ये तो बात हुई की नौकरी किन ग्रहों की प्रबलता या दशा से कौनसी नौकरी मिलती है।अब बात करते हैं निरंतर प्रयास के बाद भी सफल ना होने वालों की, तो इसका कारण उस ग्रह की निर्बलता को ही सामान्यतः मैंने देखा है। तो पराक्रम स्थान, पंचम भाव या दशम स्थान में विराजमान जो ग्रह निर्बल हो उसे शक्ति देनी होती है।

उदाहरण के लिए कोई पुलिस इंस्पेक्टर की तैयारी कर रहा है। सूर्य या मंगल तीसरे भाव में है परन्तु उस मंगल की डिग्री 5 से कम है तो वह जातक इंटरव्यू में फेल हो जायेगा तो ऐसे में मैं उन्हें परीक्षा से पहले 7 कैरेट का मूँगा पंचधातू में व साथ में मंगल यंत्र धारण करवाऊँगा तो इस उपाय से जातक का मंगल बलवान हो जायेगा व उसे सफलता मिलनी सुनिश्चित हो जायेगी। यहाँ मैंने केवल एक उदाहरण दिया है।

हर कुंडली में ग्रहों की स्थिति भिन्न-भिन्न होती है।व ग्रहों की स्थिति अनुसार ही हमें विषय चयन करना होता है, तैयारी करनी होती है,उपाय करने होते है। तब जाकर हम सफलता सुनिश्चित कर सकते है। आप भी यदी किसी अपने की अपनी संतान या स्वयम् के कैरियर या नौकरी को लेकर संशयित है या सफलता से कुछ कदम दुर है तो अपना कुंडली विश्लेषण अवश्य करवाकर अपना भविष्य जान भी सकते हैं व सफलतापूर्वक तय भी कर सकते है।

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Delay in Marriage astrology by rajesh shrimali ji best astrologer in jodhpur

Delay in Marriage Vedic Astrology By Shrimali Ji

Powerful Solution for Delay Marriage By Rajesh Shrimali Ji

Delay in Marriage Vedic Astrology By Shrimali Ji: किसी के विवाह में देरी के लिए मैं जब किसी का कुंडली अध्ययन करता हूँ तो अलग-अलग कुंडलियों में उसकी अलग-अलग वजह होती है। परन्तु फिर भी कुछ बड़े कारण जो एक महिला या पुरूष के विवाह में देरी का कारण बनते है। मै राजेश श्रीमाली आपके सामने रख रहा हूँ। जिससे सबसे पहला कारण है, मांगलिक होना- जब किसी भी कुंडली के पहले, चौथे,सांतवे,आठवें या बारहवें भाव में मंगल होता है तो ऐसा लड़का या लड़की मांगलिक कहलाते है या होते है।

मांगलिक का विवाह 26 वर्ष के पश्चात् ही होता है, कुछ माँगलिक लोगों का विवाह पहले हो सकता है यदी वो शुक्र या गुरू की दशा भोग रहे हो। आप को मै यहाँ ये बात भी बताता चलूँ की आंशिक मंगल जैसी कोई स्थिति कुंडली में नही होती है। मांगलिक के अलावा दुसरा जो सबसे बड़ा कारण विवाह में देरी का होता है वह है- यदी शुक्र पर मंगल व शनि अपनी द्रष्टि कर लें तब भी विवाह में देरी होती है। और यह स्थिति जातक के प्रेम विवाह होने के आसार को प्रबल कर देती है।

या आप ये मान लें की ऐसे जातकों जिनकी कुंडली में शुक्र पर मंगल व शनि द्रष्टि करते है उनका प्रेम विवाह ही होता है। तीसरा जो महत्वपूर्ण कारण है वह है। शनि का सांतवे भाव में स्वराशि का हो जाना, यदि किसी की कुंडली मे सप्तम भाव में शनि स्वराशि का हो जाता है तो उसकी वर या वधु बहुत अच्छी मिलती है, उस जातक को उससे शादी के बाद बहुत फ़ायदे भी मिलते है। परन्तु शादी जरूर देरी से होती है। राजेश श्रीमाली जी के अनुसार कई जातकों का तो विवाह 36 वें साल के बाद होता देखा गया है।

चौथा जो सबसे बड़ा कारण विवाह में देरी का श्रीमाली जी बताते है वह है कुंडली में शुक्र का नीच का होना, यदि किसी की कुंडली में शुक्र नीच का है उस स्थिति में भी विवाह में देरी तय मान सकते है। आईये अब बात करते है तलाक की- किसी भी जातक का तलाक होने या वैवाहिक जीवन ख़राब होने का सबसे बड़ा कारण सांतवे भाव का स्वामी नीच का होना होता है,

उदाहरण के तौर पर किसी की कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी मंगल है और वह नीच का है तो जातक को जब मंगल की दशा लगेगी तब निश्चित रूप से उसका तलाक होगा या वैवाहिक जीवन ख़राब हो जायेगा। इसके अतिरिक्त गुण ना मिलना, किसी एक की कुंडली बहुत उच्च अभिलाषी व दुसरे की कुंडली सामान्य हो तब भी तलाक या वैवाहिक जीवन ख़राब होता है।इसलिए अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए कुंडली मिलान, मंगल प्रभाव, शुक्र व शनि की स्थिति देखनी ज़रूरी होती है।

वर्ना जीवनसाथी से शारिरिक असंतुष्टी, सेक्स व रोमांस से जुड़ी समस्याओं, संतान उत्पत्ति में बाधा, निरन्तर पैसे का अभाव ऐसे जातकों को देखना पड़ता है। जिससे वैवाहिक जीवन ख़राब हो जाता है। तो आपको राजेश श्रीमाली जी ने विवाह में देरी(Delay in marriage) तलाक(Divorce) सातवें घर(Seventh House) के नीच ग्रहों के प्रभाव से होने वाली परेशानियों के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के प्रकाश डाला है।

7th house astrology
 
कुंडली के बारह भावों में सबसे महत्वपूर्ण भाव, ये घर ही तय करता है की आपको कैसी पत्नी/पति मिलने वाला है। फिर ये ही भाव तय करता है की आपका जीवनसाथी कैसा होगा या है, सातवें भाव पर एक आदमी या औरत का बहुत कुछ टिका होता है।
जीवनसाथी सही तो सब सही कई कुंडलियाँ को बिना मिलाये शादियाँ होती है। सातवें भाव के सही होने के बावजूद कुंडलियाँ आपस में नही मिलती जिससे आपस में लड़ाई-झगड़े,मारपीट रोज़ का काम हो जाता है।
 
विवाह पश्चात के प्रेम सम्बंध, तलाक़ आम हो गया है। भारत में लाखों केस तलाक़ के लिए अदालतों में लम्बित है,लाखों तैयारी में है। एक कुंडली का एक भाव बहुत होता है।। गणना के लिए सुखी या दुखी तय करने के लिए। अब इसके अलावा एक और समस्या जो दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.. विवाह में देरी.. सही जीवनसाथी तक पहुँच ना हो पाना..!
 
तो आइये… देखते है आपको सही और सटीक जीवनसाथी कब और कैसे मिलें, क्यों हो रही है, शादी में देरी, क्या कहती है आपकी कुंडली और क्या कहता है आपकी कुंडली का सातवाँ घर ?
 
आपका : राजेश श्रीमाली
गुनाह तेरा भी नहीं, ग़लत में भी नहीं..
फिर क्या वजह…
तू वहाँ,मैं यहाँ ।।
वजह.. मैं बताऊँगा..
भरोसा रखिये,भरोसा किजियें..भरोसे पर दुनिया टीकी है
 
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Rahu effect राहु प्रभाव by rajesh shrimali Ji best astrologer in jodhpur rajasthan

Rahu Effects & it’s Remedies By Shrimali Ji

How To Please Rahu by Rajesh Shrimali Ji - rajeshshrimali.com

Rahu Effects & it’s Remedies By Shrimali Ji:

आप गुमसुम एवं खोये-खोये रहते है ? 

तो आप शायद राहू की दशा भोग रहे है, अज्ञात भय, दिमाग व मन इस प्रकार विचलित कर देता है, की व्यक्ति सोचता कुछ और है और करता कुछ और है। हर निर्णय गलत होने लगता है या निर्णय लेने की क्षमता ही समाप्त हो जाती है, आलस्य, दिन में सोने और रात में जागने की समस्या से भी कुछ लोग ग्रसित हो जाते है, भाग्य, ज्योतिष एवम तंत्र पर भरोसा जाग जाता हैं, परंतु काम करने कि इच्छा शाक्ति कम हो जाती है बड़ा रोग होने का भय सताता है। इस भटकाव से बचने के लिए राहु की दशा भोग रहे लोग, शिव आराधना एवं भैरवः पूजा से इसका निदान पा सकते है, गोमेद भी धारण करना चाहिए, परंतु राहु कुंडली में नीच का न हो, इसका ध्यान रहे।

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Kundali Milan for Marriage Shadi ke liye kitne gun milne chahiye Kundali Match Making Kundali Milan in hindi

Shadi Ke Liye Kitne Gun Milne Chahiye

Kundali Match Making | Kundali Milan in Hindi | Matchmaking for Marriage

सफल शादी के लिए कितने गुण मिलने चाहिए? – What are the qualities required for a successful marriage?
क्या गुण मिलान ही कुंडली मिलान है? – Is Kundali matching the same as Gun matching?
क्या शादी से पहले कुंडली मिलाना ज़रूरी है? – Is it necessary to match horoscope before marriage?
क्या 18 से कम गुण मिलने पर भी विवाह कर सकते है? – Can you get married even if you have less than 18 qualities?

Shadi Ke Liye Kitne Gun Milne Chahiye by Shrimali Ji: ये कुछ ऐसे सवाल है जो अक्सर विवाह योग्य लोगों के सामने आते है।उनके माता-पिता के सामने आते है, कहीं रिश्ता अच्छा होता है तो गुण नही मिलते और कही गुण मिलने के बाद भी हम कह देते है की कुंडलियाँ नही मिल रही!! तो आईये सबसे पहले जानते है की एक लड़के और लड़की की कुंडली मिलान में कुल यानी अधिकतम 36 गुण होते है। 36 में से 18 गुण कम से कम मिलने चाहिए। 18 से कम गुण मिलने पर विवाह नही किया जा सकता। 22 से 24 गुण मिलना उत्तम माना जायेगा। 24 से 27 गुण मिलना अति उत्तम माना जायेगा व 27 से 32 गुण श्रेष्ठ माने जाते है। 34 गुण मिलने वाले जोड़ों को परम माना जायेगा। 34 से अधिक गुण मिलने पर भी विवाह नही करना चाहिए। 36 गुण मिलने वाले जोड़ों की अकाल मौत साथ-साथ होती देखी गई है। इसलिए 18 गुण न्यूनतम व 34 गुण अधिकतम मिलने चाहिए।

ज्योतिष के कुंडली मिलान या गुण मिलान के 36 गुणों को 8 भागों में बाँटा जाता है जो इस प्रकार है – वर्ण,वश्य,तारा,योनि,मैत्री,गण,भकूट,नाड़ी । श्रीमाली जी के अनुसार इसमें योनि व नाड़ी मिलान सबसे महत्वपूर्ण है।

क्या गुण मिलान ही कुंडली मिलान है?

नहीं, गुण मिलान ही कुंडली मिलान नही है, ये केवल कुंडली मिलान का एक भाग है, कुंडली मिलान में सातवें घर की स्थिति, मंगल दोष, संतान-भाव, स्वास्थ्य व मानसिक पक्ष व आर्थिक स्थिति भी देखी जाती है। इसके अतिरिक्त सास-ससुराल का भाव भी देखना होता है। यदी इनमें से किसी भी भाव या घर की स्थिति बहुत कमजोर हो तो कुंडली मिलान नही हो पाता।

मै उदाहरण के तौर पर समझाऊँ तो एक जोड़े के 25 गुण मिल गये परन्तु लड़के की कुंडली में छठा घर यानी स्वास्थ्य का भाव बहुत कमजोर है और उसे 40 वें वर्ष में उस भाव की दशा लग जाती है तो वो लडका किसी रोग से पिडित हो जायेगा।और उस लड़की की आगे की उम्र उसकी सेवा में बितेगी, किसी की कुंडली मे ससुराल का भाव इतना कमज़ोर होता है की अच्छे गुण मिलने के बाद में मुझे मना करना पड़ता है, क्योंकि उसपर ससुराल की ज़िम्मेदारी आनी तय दिखती है।इसके अलावा सातवें घर में कोई नीच ग्रह हो तब भी कुंडली मिलान में गुणों का मिल जाना कोई माईने नही करता।

कहने का मतलब ये है की केवल गुण मिलान केवल दो लोगों के आपसी सम्बंध मात्र को तय करता है।जबकि कुंडली मिलान उनके आसपास व भविष्य में होने वाली समस्त घटनाओं को देखता है।

मै इसे आपको उदाहरण के तौर पर राम व सीता के जरिये समझाता हूँ। राम व सीता की जोड़ी संसार में आदर्श जोड़ी मानी जाती है। परन्तु आप किसी को राम-सीता (Ram-Sita) की जोड़ी होने का आशीर्वाद नही दे सकते क्योंकि वो आशीर्वाद नही श्राप माना जायेगा।

राम और सीता में वैवाहिक जीवन आदर्श होते हुए उसका कोई सुख नही पाया। एक राजकुमार व एक राजकुमारी होते हुए भी वे निरंतर संघर्षमय रहे। जंगलों में भटके।सीता को अग्नि परीक्षा के बाद भी वियोग झेलना पड़ा, राम की संतान भी विरोधी रही। तो कुल मिलाकर ये कहना चाह रहा हूँ। राम और सीता के गुण तो मिले, परन्तु कमजोर भावों के कारण वे सदैव तनाव व परेशानीयों से घिरे रहें।

इसलिए गुण-मिलान ही कुंडली मिलान नही है।

क्या शादी से पहले कुंडली मिलाना ज़रूरी है?

हाँ, बहुत ज़रूरी है। आजकल के प्रेम विवाहों का जो हाल है।वो कुंडली मिलान ना करवाने का ही नतीजा है। एक समय तक लड़का-लड़की आकर्षक में बँधे रहते है। फिर उनकी कुंडलियाँ उनके ग्रह उनकी दशाएँ उनके आड़े आने लगती है।और नतीजे आपके सामने है।हर दुसरा प्रेम विवाह करने वाला जोड़ा दस साल के भीतर तलाक की नौबत तक पहुँच रहा है। इसलिए श्रीमाली जी तो यहाँ तक कहते है। प्रेम विवाह करने से पहले भी कुंडलियाँ मिलवा लेनी चाहिए। केवल भावनाओं में बहकर आज का प्रेम कल का दुख बन जाये तो क्या मतलब!!

क्या 18 से कम गुण मिलने पर भी विवाह कर सकते है?

नहीं, मै आपको 18 से कम गुण मिलने पर विवाह नहीं करने की सलाह दूँगा।

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Vashikaran Mantra in Hindi वशीकरण मंत्र by rajesh shrimali ji best astrologer in jodhpur

Vashikaran Mantra in Hindi By Shrimali Ji

What is Vashikaran Mantra & How it works?

Vashikaran Mantra in Hindi: वशीकरण जिसे आप अंग्रेज़ी में Hypnotism कहते है। वशीकरण मतलब वश में करना, बाँधना, अब किसी को वश में करने के दो ही तरीक़े है। पहला शारीरिक और दुसरा मानसिक। शारीरिक रूप से बाँधने का सबसे बेहतरीन तरीक़ा है, मोहित कर देना,आकर्षित कर देना जब आप किसी को देखकर उनके शरीर उसके रूप रंग क़द काढ़ी को देखकर उसकी ओर आकर्षित होते है।

आपका मन उस इंसान को बार-बार देखने को करता है। आप उसके साथ रहना चाहते है तो इसका मतलब आप उससे मोहित हो गये है। परन्तु ये ईश्वरीय देन है। किसी की क़द काढ़ी चाल ढाल रूप रंग नैन- नक़्श ईश्वर तय करता है। दुसरा किसी को वश में करने का तरीक़ा है-बल, ताकत जिसके जरीये आप किसी पर क़ाबू पा सकते है। उसे डराकर रख सकते है। परन्तु ये तरीक़ा उत्तम नही है।

क्योंकि ये क्षणिक है। जब तक वो आपसे डरा है या दबा है तब तक ही वो आपके क़ाबू में या वश में रहेगा, आपके नियंत्रण से बाहर जाते ही वो आपका उल्टा दुश्मन बन जायेगा। तो फिर ऐसा क्या हो !! जिसके जरीये आप किसी को अपने वश में रख सके, अपने नियंत्रण में रख सके आप जो कहे अगला मानने को विवश हो जाये, वो आपसे दुर हो ही ना पाये, आप ऐसी शक्ति से परिपूर्ण हो की आप बोले और अगला करें।

सदियों से मनुष्य जब किसी को आकर्षित करने या आकर्षित किये रखने में असफल हो जाता है। तो उस मार्ग उस तरीके को खोजने में लगा रहा जिससे वो किसी दुसरे को अपने नियंत्रण में कर लें। वो मार्ग निश्चित रूप से वशीकरण ही है। किसी को वश में करने के लिए उसके दिमाग़ पर नियंत्रण करना होता है। उसकी मानसिकता को नियंत्रण में लेना होता है। उस जागते को सुलाना होता है।

उसे अर्ध चेतन अवस्था में ले जाना होता है। तो आप कहेंगे ये कैसे सम्भव है !! हम किसी दुसरे के मस्तिष्क पर कैसे नियंत्रण कर सकते है, उसका क्या तरीक़ा है !! उसकी क्या विधि है, कौनसा ऐसा मंत्र है ? जिसे मैं सिद्द करूँ और वशीकरण करने का सामर्थ्य मुझ में आ जाये? कौनसा ऐसा यंत्र है ? जिसे मै धारण करूँ और अगला मेरे कहे से चलने लगे?

तो मै राजेश श्रीमाली पहले बात कर लेता हूँ महिलाओं पर जो दुसरों को अपनी ओर आकर्षित और मोहित करना चाहती है।और ये कामना तो लगभग हर स्त्री रखती है। तो ये एक अचुक उपाय एक यंत्रों का समुह में आपको लाकेट या कवच के रूप में दे रहा हूँ जिसे धारण कर साधारण से रूप-रंग वाली महिला भी अति आकर्षक व सुंदर लगने लगेगी, उसके कुछ अंगों मे तेज व चमक उभरने लगेगी, शरीर में ताजगी व आयु मे कमी महसूस करेंगी।

लोग उससे बात करने और क़रीब आने को बेताब हो जाये तो भी बड़ी बात मत समझियेगा। इसके लिए मैं तीन यंत्रों को एक कवच या कहे लोकेट में समाहित कर रहा हूँ। वो तीन यंत्र है- पहला मोहिनी यंत्र दुसरा वशीकरण यंत्र व तीसरा कात्यायनी यंत्र मोहिनी यंत्र जैसा नाम से ही पता चल गया होगा मोहकता बढ़ायेगा आपके भीतर नई ताजगी नई उमंग भर देगा।

वशीकरण यंत्र बिना बोले लोगों को आपके करीब आने के लिए लोगों को मजबूर कर देगा कात्यायनी यंत्र उन रिश्तों को आपकी मनमर्ज़ी से चलाने में सहयोगी रहेगा। मै ये नही कहता की ये केवल प्रेम की लालसा में पड़ी औरतों के लिए ही है। ये उन कामकाजी महिलाओं के लिए भी है जो पब्लिक रिलेशन के कामों से जुड़ी है, काल सेंटर में काम करती है।

front आफिस में काम करती है। ये तीन यंत्रों का महा कवच उन लड़कियों के लिए भी बहु उपयोगी है जो विवाह योग्य है और मनचाहा लड़का नही मिल पा रहा है या जो कई लड़कों से विवाह प्रस्ताव अंतिम दौर में ख़ारिज या समाप्त हो जाते है। अगला कोई जवाब नही देता। आप राजेश श्रीमाली के बेहतरीन अनुंसधान के पश्चात् बनाये इस लाकेट को धारण कर निराश नही होगी इतना तय है।

जब भी आप इस लाकेट को पाना चाहे धारण करना चाहे- मोहिनी+वशीकरण+कात्यायनी याद रखें। सभी यंत्रों को पूर्ण रूप से शक्ति प्रद में स्वयम् या योग्य व्यक्ति करते है। आईये अब बात करते है- पुरुषों की पुरुष यदी किसी का वशीकरण करना चाहते है या अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचना चाहते है तो उन्हें वशीकरण यंत्र के साथ में तार्कट यंत्र व कामाक्षी यंत्र धारण करवाऊँगा जिससे लोग उनकी और आकर्षित भी होंगे जिसके परिणाम स्वरूप उनके व्यापार का विस्तार होगा, उनका सम्पर्क बढ़ेगा।

Powerful Vashikaran Mantra

मैं आपसे वशीकरण मंत्र की भी चर्चा कर लूँ- वशीकरण मंत्र का रोजाना 21 बार उच्चारण अवश्य करें ये आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी भी करेगा,आपका सम्पर्क बढ़ायेगा आपके चेहरे की आभा बढ़ायेगा और शरीर और मन में नई चेतना और उंमग भर देगा। मै आपको केवल 2 शब्दों का वशीकरण मंत्र दे रहा हूँ । आप बिना किसी विधि-विधान बस 21 बार इस मंत्र का कहीं भी चलते-फिरते, बैठे उच्चारण कर लें। चमत्कार निश्चित है।

वशीकरण मंत्र- ऊँ हूं – बस 21 बार प्रतिदिन

आईये अब बात करते है। यदी आप वशीकरण के शिकार है या आपको लगता है किसी ने आप पर कुछ करवा रखा है। आप काले जादू Black-magic जैसी किसी विधा के शिकार है तो आपको बगलामुखी यंत्र के साथ शत्रुजय व यक्षणी इन तीन यंत्रों का एककवच धारण करते ही वह समस्त बाधाओं व किये कराये से बाहर निकल जाता है। यह वास्तविक शत्रुओं से रक्षा भी करता है।ये कोर्ट कचहरी व मुक़दमों में विजय दिलाने वाला एक यंत्रों का समुह है।ये वशीकरण की यंत्र विधि है।

इसके अतिरिक्त आप इत्र का नियमित प्रयोग करें। इलायची अपने पास रखने से क्या होता है। लौंग या कपूर का वशीकरण में क्या है, उपयोग? आपकी कुंडली का कौनसा ग्रह प्रबल हैँ। और उसकी सहायता या वर्धन से आप कैसे आकर्षक के केंद्र बन सकते है। इन सब बातों और रहस्यों को जानने के लिए आप राजेश श्रीमाली जी से कुंडली विश्लेषण करवाकर जान सकते है।

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Rajesh Shrimali

Expert in Vedic Astrologer, Kudali Vishleshan, Numerology & Horoscope Consultation

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Gatti Dhan ki Teen Gaati By Shrimali Ji

Dhan ki Teen Gaati By Rajesh Shrimali Ji

Dhan ki teen gaati hai: Daan, Bhog aur Naash

धन की तीन गति है..दान,भोग और नाश। तत्व की एक गति है मार्ग, योग की एक गति है, बिन्दु। योनि की एक गति है, स्खलन। काया की एक गति है, अंत (मौत)। बुद्धी की एक गति है, मौन। दिशा की गति,चार है । दशा की गति, सात है। पहर की गति आठ है। गति का अर्थ speed नहीं final position होता है।गति मतलब इससे आगे कुछ नहीं। साधो । साधो का मतलब Agree with you .. जय श्री कृष्णा। आपका -राजेश श्रीमाली 

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Guru aur Shikshak Main Antar by shrimali ji

Guru aur Adhyapak Main Bhed

Guru aur Shikshak Main Antar by shrimali ji

Difference Between Teacher & Guru

आज काफ़ी सारी पोस्ट गुरू पूर्णिमा पर देखीं, एक दो लोगों की टाइम लाइन पर ये सवाल था की, शिक्षक और गुरू में क्या फ़र्क़ होता है? तो सवाल अच्छा लगा तो सोचा मेरा जवाब या सोच आप लोगों से साझा कर लूँ 
 
शिक्षक – शिक्षक आपको केवल आपको इतना ज्ञान दे सकता है जितना उसने ख़ुद पढ़ रखा है,उसके पढ़ाने का अनुभव भी आपको मिल सकता है,पर वो ज्ञान की सीमा के बाहर नहीं जा सकता, और अगर कोई विद्यार्थी उस शिक्षक से ये पूछ ले की इससे आगे क्या ? तो जवाब मै नहीं जानता, या आपके कोर्स में इतना ही है.. ये मिलें !!
 
गुरू – गुरू और शिष्य में ऐसा नहीं होता, गुरू पहले अपना ज्ञान देता है,फिर अपना अनुभव,और फिर अगर शिष्य पूछे की इससे आगे क्या?? तो वह गुरू उसके लिए मार्ग भी बनाता है और साथ भी चलता है, की चल देखते हे .. इससे आगे क्या !!!
शिक्षक ऐसा नहीं करता।
 
इसलिए आज तक किसी लड़ाई को देख लें, गुरू शिष्य की साथ लड़ता है। गुरू का ज्ञानी होना इतना ज़रूरी नहीं, उसका अनुभवी होना ज़रूरी होता है, और जो वास्तव में गुरू होता है,वह हमेशा अपने चेले को अपने से बेहतर देखना चाहता है।
उस्ताद और सगिरद भी लगभग वही आते है।पर उर्दू का उस्ताद ज़िन्दगी जीने का जुगाड़ भर तैयार कर सकता है या हुनर सिखा सकता है।
 
वो प्रयोग नहीं करता। प्रयोग केवल गुरू करता हे, अपने चेले(शिष्य) की सफलता या कामना के लियें । कभी ख़ुद पर तो कभी अपने शिष्य पर। गुरू जीत की गारण्टी नहीं देता, पर साथ खड़े रहने की गारण्टी पूरी देता है। और गुरू की इस गारण्टी से शिष्य में जागता है।
 
ख़ुद पर भरोसा!!! और कहते है…
भरोसे पर दुनिया क़ायम है।
 
गुरू पूर्णिमा व आगामी सावन मास की आप सभी को मेरी और से बहुत बहुत बधाई ।
आपका : राजेश श्रीमाली
बाक़ी गुरू की करनी गुरू भरेगा, चेले की करनी चेला।

Rajesh Shrimali

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